Revolution Through the Gita : Acharya Prashant


गीता से बड़ा विद्रोह दुनिया में नहीं हुआ है।

ठंडे मुर्दों के लिए नहीं है ये, आग है गीता!

लोहे की गर्म सलाख देखी है - लाल! वो है गीता।
पुष्पमाल नहीं है गीता।

युद्धक्षेत्र में अंगार है गीता, रक्तधार है गीता,
और जिनको खरोंच भी नहीं खानी है
वो लगे हुए हैं, “गीता, गीता, गीता ..”

तुम क्या करोगे?
तुम जाओ, तुम दुर्योधनों की मालिश करो,
कुछ पैसा-वैसा मिल जाएगा।
क्यों परेशान होते हो नाहक!
तुम्हारे लिए नहीं है गीता।

*~ आचार्य जी 🪔*

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