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प्राचीन भारत और ऋषियों के समय में कम कपड़े पहनने का कारण

  हाँ, प्राचीन भारत और ऋषियों के समय में कम कपड़े पहनने  का चलन था, लेकिन इसे आज के 'बिकिनी' फैशन या अश्लीलता से नहीं जोड़ा जा सकता। उस समय का पहनावा पूरी तरह से भारत की गर्म जलवायु, सादगी और प्राकृतिक जीवनशैली पर आधारित था। प्राचीन भारतीय पहनावे और स्त्रियों के वस्त्रों से जुड़े मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं: 1. 'स्तनपट्ट' (Stanapatta) का उपयोग ऋषियों के काल और प्राचीन भारत में महिलाएँ छाती को ढकने या सहारा देने के लिए कपड़े की एक पट्टी बांधती थीं, जिसे स्तनपट्ट (Stanapatta) या 'कंचुकी' कहा जाता था। यह दिखने में आज के 'ट्यूब टॉप' या 'स्ट्रैपलेस ब्रा' जैसा होता था। हालाँकि, इसे केवल स्तन ढकने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि दैनिक कार्यों और आश्रम के काम करते समय शारीरिक आराम के लिए बांधा जाता था। 2. मुख्य रूप से बिना सिले तीन वस्त्रप्राचीन भारत (वैदिक और उत्तर-वैदिक काल) में स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र लगभग एक जैसे और बिना सिले (Unstitched) होते थे अंतरीय (Antariya): कमर के नीचे पहना जाने वाला वस्त्र (जैसे धोती या लुंगी) उत्तरीय (Uttariya): कंधे या छाती...

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